द्रव्यमान संरक्षण का नियम

 द्रव्यमान संरक्षण का नियम या द्रव्य की अविनाशिता का नियम एक ऐसा सिद्धांत (Theory) है।  जो ये बताता है।  की ब्रह्माण्ड (Universe) में उपस्थित किसी भी द्रब्य का द्रब्यमान (mass) नियत हिता है। अर्थात द्रब्य ना तो नष्ट (Destroyed) हो सकता है ।  ना ही उत्पन्न (Generated)।  क्या आप सोच रहे है। द्रब्य के द्रब्यमान को नष्ट किया जा सकता है। आप गलत सोच रहे है। क्योकि द्रब्य को परिवर्तित (Changed) किया जा सकता है। ना की इसे नष्ट (Destroyed) किया जा सकता है।

द्रव्यमान संरक्षण का नियम किसने दिया था :-

 इस नियम का प्रतिपादन (Rendering) रासायनिक वैज्ञानिक लॉमनोसॉव ने किया इसके बाद लेवाशिये ने इस नियम की पुष्टि की।  

द्रव्यमान संरक्षण का नियम के महत्वपूर्ण तथ्य :-

उदहारण :- AgNOз + NaCl ⟶ AgCl + NaNOз क्रिया से पहले AgNOз तथा NaCl का सयुक्त द्रब्यमान क्रिया के के बाद प्राप्त AgCl + NaNOз के सयुक्त द्रव्यमान बराबर है। H₂S + Cl₂ ⟶ 2HCl + S क्रिया से पहले H₂S तथा Cl₂ का सयुक्त द्रब्यमान क्रिया के के बाद प्राप्त 2HCl + S के सयुक्त द्रव्यमान बराबर है। 2KI + Cl₂ ⇾ 2KCl + I₂ क्रिया से पहले KI तथा Cl₂ का सयुक्त द्रब्यमान क्रिया के के बाद प्राप्त 2KCl + I₂ के सयुक्त द्रव्यमान बराबर है।

इतिहास :-  प्राचीन यूनानियों ने अपना प्रस्ताव दिया था की ब्राह्मण के सभी पदार्थो का द्रव्यमान नियत होता है इसके बाद भौतिक बैज्ञानिक लैवोजियर 1789 में द्रव्यमान के संरक्षण सिद्धांत दिया।  

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