सनातन धर्म के अनुसार देव शयनी एकादशी पर समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं देवशयनी एकादशी इस साल 10 जुलाई को मनाई जा रही है 14 माह के लिए भगवान विष्णु अपने योग निद्रा में फिर सागर में योग निद्रा में रहेंगे। इस कारण इस महीने को चतुर्मास कहा जाता है कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तक श्रीहरि योग निद्रा में विश्राम करेंगे। इस महीने की कोई मांगलिक कार्य बाधित होगा शुक्ल पक्ष में एकादशी के बाद सारे शुभ कार्य मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे

हमारी सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार यदि कोई व्यक्ति आस्था के साथ श्रीहरि का पूजन विधि से करता है। तो उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है उनको सभी पापों से मुक्ति मिलती है। एवं जीवन में शांति समृद्धि, सुख शांति का आगमन होता है।

इस दिन दान का बड़ा महत्व बताया गया है गरीबों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार फल मिठाईयां दवाइयां और वस्त्र और पैसे देने से रोगों का नाश होता है। देव शयनी एकादशी के दिन स्नान करके श्रीहरि का ध्यान करना चाहिए उनके समक्ष घी का दीप जलाकर

फूलों की माला अर्पित करने चाहिए फिर श्रीमद् गीता का पाठ करना चाहिए इससे पित्र प्रसन्न होते हैं।

धन, संतान की प्राप्ति

इस दिन दिन पूजा का विधान बताया गया है कि कच्चे दूध में केसर मिलाकर भगवान विष्णु का अभिषेक करने से आर्थिक स्थिति में सुधार आता है एवं धन संपदा बनी रहती है देवशयनी एकादशी पर सहस्त्रनाम या गोपाल सहस्वनाम का पाठ करने से शीघ्र कष्ट दूर होते हैं और दिव्य संतान की प्राप्ति होती है।

इस दिन जल में आवले का रस मिलाकर श्रीहरि का स्नान कराएं कराने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की कृपा इस दिन तुलसी के नीचे दिया जलाना चाहिए। अरे नदी में दीप दान करना चाहिए रात को जागरण भजन कीर्तन, स्तुति, करने से 100 गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इससे मा लक्ष्मी और भगवान विष्णु की स्थिर कृपा मिलती है।

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